वुहान की एक सैटेलाइट तस्वीर सामने आई है जिसमें सल्फर डाई ऑक्साइड गैस एक बड़े आग के गोले के तौर पर नजर आ रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसा तब होता है जब बड़ी मात्रा में मेडिकल कचरा या शव जलाए जाते हैं। वहीं, इंटेलवेव के अनुसार, करीब 14,000 शवों को जलाने पर ही इतनी भारी मात्रा में धुंआ निकलता है। इसके अलावा ब्रिटिश अखबार डेलीमेल ने भी वुहान की सैटेलाइट तस्वीर पर संदेह जताया है। बता दें कि चीन में कोरोनावायरस से होने वाली मौतों की संख्या 1 हजार के पार पहुंच गई है जबकि, 40 हजार से ज्यादा संक्रमित हैं। हालांकि, चीन सरकार पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे वास्तविक आंकड़े छुपाने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा चीन में बड़े पैमाने पर शवों को गुपचुप तरीके से जलाया जा रहा है। हालांकि चीन में शव जलाने की परंपरा नहींं है।
160 भारतीयों ने लगाई मदद की गुहार
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन ऐंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के एक अध्ययन में सामने आया है कि वायरस के इसी रफ्तार से फैलते रहने पर फरवरी के आखिर तक वुहान की 5 प्रतिशत आबादी यानी 5 लाख से ज्यादा लोग कोरोनावायरस की चपेट में आ जाएंगे। 23 जनवरी से ही शहर के 1 करोड़ 10 लाख लोग अपने ही घरों में कैद हैं। वुहान में 171 बांग्लादेशी लोग फंसे हुए हैं लेकिन बांग्लादेश के एयर क्रू ने वहां जाने से इंकार कर दिया है। वहीं, जापान के तट पर 5 दिन से रुके हुए एक लग्जरी क्रूज में 160 भारतीय क्रू सदस्य हैं जिन्होंने भारत सरकार से सहायता मांगी है।
वुहान में गैस का स्तर 21 गुना खतरनाक
गौरतलब है कि वुहान में सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर 1700 यूजी/घन मीटर यानि खतरे के स्तर से 21 गुना ज्यादा है। 80 यूजी/घन मीटर खतरनाक माना जाता है। वुहान के अलावा चोंगक्विंग का ही यही हाल है। जबकि दोनों शहरों के बीच करीब 900 किमी की दूरी है। साथ ही शहरों के बीच चलने वाली 31 बुलेट ट्रेन भी फिलहाल बंद हैं। ऐसे में दूसरे ट्रैफिक से भी इतनी बड़ी मात्रा में गैस नहीं निकल सकती।